Antarvasna Hindi Story कुंवारी बहन की चुदाई-1

Antarvasna Hindi Story: मैं अपनी चाची  की बेटी को एक परीक्षा दिलाने ले गया था. मेरी बहन भरे हुए तन की मलिका है। उसको देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है।

मेरा नाम सागर है, मेरी उम्र 27  साल है।

यह कहानी मेरी और मेरी चाची  की लड़की प्रीति  की है जिसकी उम्र 24  साल है।
पहले मैं आपको प्रीति  के बारे में बता देता हूँ. प्रीति  की हाइट 5 फुट 2 इंच है। उसका रंग बिल्कुल दूध के जैसा गोरा है। उसकी ब्रा का साइज़ 34 और उसकी गांड का साइज़ 38 है।
प्रीति  शुरु से ही भरे हुए तन की मलिका है। उसको देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है।

इस कहानी  से पहले वह बिल्कुल अक्षत यौवना थी। वह बिल्कुल ही शरीफ लड़की है। उसने हरियाणा के एक कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रखी है। उसने अपने आप को बिल्कुल मेनटेन कर के रखा है। उसने इस कहानी  से पहले लंड कभी भी नहीं देखा था, ऐसा उसने मुझे बताया। प्रीति  एक पढ़ाकू किस्म की लड़की है।

प्रीति  को मैं जब भी गले लगाता था तो उसकी बड़ी बड़ी चूचियां हमेशा करंट पैदा करती थी शरीर में, पर  मैं इन बातों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता था।Antarvasna Hindi Story

पर  एक कहानी  ने मेरा और प्रीति  का जीवन ही बदल दिया।

Antarvasna Hindi Story कुंवारी बहन की चुदाई-1

एक दिन मेरे पास मेरी चाची  का कॉल आया कि क्या मैं प्रीति  को परीक्षा  दिलवाने के लिए उसकी साथ जा सकता हूँ?
प्रीति  ने कोई हिमाचल में नर्सिंग के फील्ड का कोई परीक्षा  भर रखा था।
किसी काम की वजह से मैंने जाने के लिए मना कर दिया।
पर  घर वालों में से से किसी के पास व्यक्त  न होने की वजह से मुझे उसके साथ जाना पड़ा।

प्रीति  का परीक्षा  मनाली में था। पर  बाद मैं मुझे पता चला उसने जानबूझ कर वहां का सेण्टर भरा था ताकि पेपर के साथ कहीं पर घूमा भी जा सके।

फिर रात को मेरे पर प्रीति  का फ़ोन आया- भैया, आप चलने के लिए तैयार रहें।
परीक्षा  पिछले साल जनवरी महीने की 15 तारीख को था।

बाद मैं मैंने तय किया कि सर्दी की वजह से हमें एक दिन पहले ही चलना पड़ेगा, क्यूंकि सर्दी की वजह से रास्ते रुक जाते हैं पहाड़ी इलाकों में!
इस पर प्रीति  चहक पड़ी क्यूंकि वह ज्यादा कहीं बाहर नहीं गयी थी। प्रीति  ने प्रोग्राम के तहत अपनी पैकिंग पहले से ही कर ली थी।

मेरी चाची  का घर सोनीपत में है इसलिए हमने 13 जनवरी को सुबह चंडीगढ़ के लिए बस पकड़ी. वहीं से हमें मनाली की लिए बस पकड़नी थी।

हम चंडीगढ़ 11 बजे पहुँच गए, उसके बाद हमने बस अड्डे पर घर लाया हुआ खाना खाया। मनाली की हमारी बस 5 बजे शाम को थी।
हमारे पास काफी व्यक्त  था इसलिए प्रीति  ने कहा- चलो भैया, हम कहीं घूम के आते हैं।
मैंने कहा- ठीक है चलो चलते हैंAntarvasna Hindi Story

हमने वहीं प्राइवेट लोकर रूम में अपना सामान रख दिया और प्रीति  ने अपने पास एक मफलर रख लिया ताकि अपने सर पर बांध सके।
बाहर निकलते ही हमने ऑटो ले लिया और सेक्टर 17 की तरफ चल पड़े।

वहां पर चंडीगढ़ के सुंदर सुंदर लड़कियों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया पर  प्रीति  के साथ होने की वजह से मैंने बड़ी मुश्किल से कण्ट्रोल किया।
एक रिक्शा वाले ने तो हम दोनों को प्रेमी और प्रेमिका समझ कर होटल चलने के लिए कहा. जिस पर प्रीति  ने उसको भगा दिया और हंसने लग गयी.
उसको देख कर मैं भी हंसने लग गया।

वहां घूमने के बाद हम 4:30 बजे बस स्टैन्ड  पर आ गए, अपना सामान ले कर बस का इंतजार करने लग गए।

हमारी सीट बस में बिल्कुल लास्ट वाली थी. बस में प्रीति  को खिड़की वाली सीट मिली थी इसलिए वह खुश थी। प्रीति  को बैठने में तकलीफ हो रही थी क्योंकि उसने जीन्स की पैंट पहन रखी थी, शायद उसकी फिटिंग सही नहीं थी इसलिए उसको कुछ मुश्किल हो रही थी.

इतने में बस चल पड़ी।

रास्ते भर प्रीति  अपने कूल्हों को इधर उधर कर रही थी, इस दौरान मेरी नजर उसकी पैंट पर गयी और मुझे उसकी कच्छी के दर्शन हो गए जो पिंक कलर की थी।
कुछ देर बाद प्रीति  सो गयी और मेरे कंधे पर अपना सर रख लिया.

कुछ देर बाद मैं भी सो गया, जब मेरी आँख खुली तो प्रीति  का एक हाथ मेरे पैंट पर लंड वाली जगह था और उसकी सूरत बड़ी ही सुंदर लग रही थी.
मुझे पता नहीं क्या हुआ, उसके हाथ को मैने  हटाने की बिल्कुल  कोशिश नहीं की।Antarvasna Hindi Story

तभी ड्राईवर ने ब्रेक लगाया. झटके के साथ प्रीति  की आँख खुली और उसने अपने हाथ को मेरे लंड पर से एकदम हटा लिया और मुझसे नजरें चुराने लगी।

सुबह हम मनाली पहुँच गए. वहां पहुँच कर प्रीति  को बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसको देख कर लग नहीं रहा था कि वह परीक्षा  देने के लिए आयी है।

हमने एक होटल में कमरा ले लिया । फिर  दोपहर को अपने सेण्टर की तलाश में निकल गए। परीक्षा  सेण्टर शहर से 14  किलोमीटर दूर था। परीक्षा  का रिपोर्टिंग व्यक्त  11  बजे था।
हम वापस होटल में आ गए और मैं कुछ देर बाहर घूमने निकल गया।

जब मैं वापस आया तो प्रीति  नहाने की तयारी कर रही थी। प्रीति  बाथरूम में नहाने चली गयी.

कुछ देर बाद मेरा ध्यान वहां रखे उसके कपड़ों पर गया. वहां एक बड़े गले की टीशर्ट, लोअर और उनके बीच में लिपटी हुई थी उसकी काले रंग की कच्छी और बैक स्ट्रिप वाली ब्रा जिसका साइज़ 34 था।
उसके कपड़ों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया।

तभी बाथरूम से प्रीति  की आवाज आई- भैया मेरे कपड़े बाहर ही रह गए हैं. प्लीज मुझे पकड़ा दो मेरे कपड़े।
जैसे ही मैं कपड़े देने के लिए दरवाजे की तरफ गया, तभी मुझसे हड़बड़ाहट में कपड़े नीचे गिर गए.Antarvasna Hindi Story

मैंने कपड़े उठाये और प्रीति  ने दरवाजा खोल कर अपना हाथ बाहर की तरफ करके कपड़े ले लिए। तभी मुझे प्रीति  की गांड के दर्शन हो गए … एकदम सफ़ेद गांड थी मेरी बहन प्रीति  की!
एक बार तो ऐसा  लगा कि मैं अभी बाथरूम में घुस कर उसकी चुत का mmओज लू।
पर  मैंने अपने आप को कण्ट्रोल किया कि ये मैं क्या सोच रहा हूँ अपनी बहन के बारे में।

कुछ देर बाद प्रीति  अपने कपड़े पहन कर बाहर निकाल आई।  बड़ा गला होने के कारण उसकी ब्रा साफ साफ दिखाई दे रही थी, जिसके कारण  मेरे लंड को कण्ट्रोल से बाहर कर रही थी।
तभी मैंने कहा- प्रीति , अब तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी.
प्रीति  ने कहा- क्यूँ भाई? अभी तो मैं छोटी हूँ. और मुझे अभी और पढ़ना है।

तभी उसने कहा- पर  भैया आप को ये अचानक मेरी शादी की बात का खेयाल किउ आया ?
मैंने स्थिति को भांप कर बात को टाल दिया।
फिर हम खाना खाकर सो गए।

अगले दिन हम व्यक्त  से उठ कर नहा धोकर सेण्टर की तरफ चले गए।

पेपर 3 घंटे का था. मैंने इधर उधर घूम कर समय बिताया। जब प्रीति  पेपर दे कर बाहर आई तो मैंने उससे पूछा- पेपर कैसा हुआ?
तो उसने कहा- पेपर तो अच्छा हुआ है. शायद सिलेक्शन भी हो जायेगा।
फिर हम होटल के लिए निकल पड़े।Antarvasna Hindi Story

रास्ते में उसने मुझसे कहा- अब 2 दिन मजा लेकर  घूमना है.
मैंने कहा- नहीं, हम शाम को निकल जाएंगे घर के लिए!
तो उसने कहा- भाई, प्लीज कोई बहाना बना कर 2 दिन तक रुकने का प्रोग्राम बनाओ।

फिर उसकी बात मन कर मैंने चाची  को फ़ोन कर दिया- हम दो दिन बाद घर आयेंगे।
चाची  की रजामंदी मिलने पर प्रीति  ने मुझे गले लगा लिया और मैंने अपनी छाती पर उसकी बड़ी बड़ी चूचियां महसूस की.
पर  तभी वो मुझसे अलग हो गई।

उसने बताया कि यहाँ 40  किलोमीटर दूर एक खूबसूरत  सा गाँव है, जहाँ की वादियाँ बहुत ही मनमोहक हैं. उसकी जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा और हम उस गाँव के लिए निकल पड़े.
रास्ते में मैंने उससे कहा- मुझे कुछ तबियत ठीक नहीं लग रही!
उसने रास्ते में एक मेडिकल स्टोर से कुछ दवाई ले ली.

उसी दुकान पर एक नवविवाहित जोड़ा खड़ा था शायद उनको भी कुछ चाहिए था. प्रीति  उनको देख कर हंस रही थी और और लेडी भी हंस रही थी.
जब मैंने प्रीति  से उस बारे में पूछा तो उसने बात को हंस कर टाल दिया. मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया.

2  घंटे के बाद हम उस गाँव में पहुँच गए. वह गाँव देखने में बहुत ही सुंदर था। हम वहां तीन घंटे तक घूमे और फिर वापस जाने के लिए चले.
तो एक लेडी, जो वहीं की लग रही थी, ने हमको कहा- भाई साहब, यहाँ का सबसे बढ़िया नजारा तो सुबह के वक्त का है. जो भी आता है वो देखता जरूर है. आपको भी देखना चाहिए.

उसकी बात सुन कर प्रीति  ने वहां रुकने के लिए कहा।
पहले तो मैंने मना किया, फिर उसकी जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा और हम वहीं रुकने के लिए तैयार हो गए।Antarvasna Hindi Story

जब मैंने उस लेडी से किसी होटल के बारे में पूछा तो उसने कहा- यहाँ कोई होटल नहीं है, आप को किसी के घर पर रुकना पड़ेगा. और वे आपसे किराया लेंगे और खाना भी बना कर देंगे.
पर  इतनी देर होने के कारण अब सभी आप से ज्यादा किराया लेंगे.
मैंने पूछा- कितना?
तो उसने कहा- कम से कम दो हजार!

प्रीति  ने कहा- ये तो ज्यादा है.
तो उस लेडी ने कहा- मेरा घर थोड़ी ऊपर है. मैं आपको पांच सो रुपये में कमरा दे दूंगी.
उसकी बात मान कर हम उस अरत  के साथ चल पड़े.

कोई आधा घंटे चलने के बाद उसका घर आया. अरत  घर पर अकेली थी क्योंकि आज घर वाले सभी किसी की शादी में गए हुए थे।

उस अरत  ने हमको एक कमरा, जिसमें डबल बैड था, वह दे दिया. और हमारे लिए खाना ले आए.

कुछ देर बाद उस अरत  के पास किसी का फ़ोन आया और वो अरत  वहां से चली गयी.
उसको लेने के लिए कोई बाईक सवार आया था.
उस अरत  ने हमें कहा- आपको डरने की कोई बात नहीं है, मैं कल सुबह तक वापस आ जाऊंगी. मेरी भाभी को बच्चा होने वाला है तो मुझे जाना पड़ेगा।

कुछ देर बाद प्रीति  अपने वही बड़े गले वाली टीशर्ट पहन कर आ गयी और मेरे पास बैठ गयी.
मैंने उससे कहा- जो मेडिसिन तुम वहां से लेके आई थी, वो मुझे दे दो.
मेडिसिन एक कागज में लिपटी थी.Antarvasna Hindi Story

प्रीति  ने जैसे ही कागज को खोला, देखा उसमे तीन गोलियां थी. प्रीति  ने कहा- दुकानदार ने एक गोली ज्यादा दे दी.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, ये भी काम आएगी।
प्रीति  ने मुझे दो गोली दूध के साथ खाने को दी। फिर मैं और प्रीति  डबल बैड पर अपनी अपनी साइड पर सो गए.

कोई दस पंद्रह मिनट के बाद मेरे को अजीब सा फील होने लग गया और मेरा लंड भी खड़ा हो गया.
तभी मैंने प्रीति  से कहा- मुझे बेचैनी हो रही है. तो उसने मुझे वो दूसरी गोली भी दे दी।

उसको खाने के बाद तो मेरी हालत और भी ख़राब हो गयी और मेरा लंड फटने को हो गया.
तभी मैंने प्रीति  को जगाया और पूछा- वो गोली किस चीज की थी?
तो उसने कहा- वो तो सर दर्द और बैचेनी के लिए थी.
मैंने कहा- ऐसा तो नहीं लगता … तुम देखो एक बार.

उसने तुरंत गोली का रैपर देखा जिसको उसने ओपन करते वक्त नहीं देखा था.
उसे देख कर वो एकदम चौंक गयी और मुझसे पूछा- आपको कुछ और भी हो रहा है?
मैंने कहा- और क्या?

तो उसने मेरे को वो रैपर दिखाया. तो मैं सारा मामला समझ गया. क्यूंकि वो गोलियां वियाग्रा की गोली थी … वो भी दो गोली मैंने खाई थी.Antarvasna Hindi Story
प्रीति  ने मेरे को कहा- भाई, मैंने शायद गलती से ये वाला पैकट उठा लिया. ये उन कपल का है जो स्टोर पर खड़ा था. वो ये गोलियां ले रहे थे और मैं इसलिए ही हंस रही थी.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *